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Wednesday 20 Sep 2017

इस बरस बसन्त तुम...

आनंद तिवारी ‘पौराणिक’
श्रीराम टॉकीज मार्ग
महासमुंद-493445 (छ.ग.)
मो. 9753757489
इस बरस बसन्त तुम...
बसन्त तुमने
वर्षों से, रुख अपना
बदल दिया
कुंजन, कानन, वन से
अपना रिश्ता तोड़ दिया
बागों के पेड़,
पतझड़ से सूखे,
पत्र विहीन हो गया
अब अमराइयों में कूकती नहीं कोयल
भ्रमरों और तितलियों ने
इधर आना छोड़ दिया
जंगल हो गये
बीहड़ों में तब्दील
टेसूओं और महुओ ंसे
गायब हो गये
रूप,  रस, गंध
रूदन करते हैं पक्षी
खो गये उनके मधुर कलरव
प्रेमियों के प्रेम-महोत्सव
अब नहीं होते
किसने तुम्हारा कर लिया अपहरण
और बना लिया तुम्हें बंधक
भव्य भवनों और फाईव स्टार होटलों में
चकाचौंध भरे स्टेजों के
फ्लावर शो और स्प्रिंग फेस्टीव्हलों में
खेत, खलिहान, गांव
बाग, बगीचे, फुलवारी
बुझी आंखों से,
तुम्हें कब से निहार रहे हैं
जिन राहों से हर बरस
आते थे तुम
धूल उड़ रही है उधर
चिरौरी सबकी मान लेना
आम्र मज्जरियों और महुओं को
मादक गंध और
पलाश पुष्पों को
दहकते चटख सुर्ख रंग देने
इस बरस, बसंत तुम
इधर आना कभी।