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Friday 22 Jun 2018

विविध भारती सेवा

भारतीय उपमहाद्वीप का बेहद लोकप्रिय रेडियो-चैनल है- विविध भारती। इसका सुरुचिपूर्ण प्रसारण हमें समय के उस पार ले जाता है, जहां स्मृतियां फिर से जी उठती है। आकाशवाणी की गौरवशाली परंपरा के अनुसार आज भी विविध भारती ने भाषा की मर्यादा और प्रस्तुति की गरिमा का ध्यान रखा है।

इतिहास के अनगिनत उल्लेखनीय स्वर विविध-भारती से संग्रहालय में सुरक्षित हैं। आकाशवाणी के बेहद लोकप्रिय चैनल विविध-भारती का शुमार विश्व के सबसे बड़े नेटवर्क प्रसारण में होता है।

विविध-भारती की परिकल्पना को सन् 1957 में साकार करने वाली हस्तियों के नाम हैं- तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री डॉ. पी.वी. केसकर, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में तत्कालीन सचिव पी.एम. लाट और आकाशवाणी के तत्कालीन महानिदेशक जगदीशचंद्र माथुर। विविध-भारती का शुरूआती स्वरूप- ''ऑल इंडिया वेरायटी प्रोग्राम'' अर्थात अखिल भारतीय विविध रंगी कार्यक्रम का था... इस सेवा को ''विविध-भारती'' नाम दिया कला एवं साहित्य मनीषी पंडित नरेन्द्र शर्मा ने।

प्रसारण के आरंभिक दौर में पहले से रिकॉर्ड किए गए कार्यक्रम प्रसारित होते थे। 3 अक्टूबर सन् 1957- सुबह 10 बजकर 13 मिनट पर शॉर्ट-वेव 19 और 25 मीटर बैंड पर आकाशवाणी के पंचरंगी कार्यक्रम- ''विविध-भारती'' का जन्म हुआ।

''ये विविध-भारती है, आकाशवाणी का पंचरंगी कार्यक्रम''... इस उद्घोषणा से पहले राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों ने शुभकामना के फूल बरसाए थे... गुप्त जी की वो पंक्तियां थीं-

''मानस भवन में आर्य जन जिसकी उतारें आरती

भगवान भारत वर्ष में गूंजे हमारी भारती''

विविध-भारती की आवश्यकता क्यों पड़ी इस प्रश्न के उत्तर में विविध-भारती के चीफ प्रॉड्यूसर रहे पंडित नरेन्द्र शर्मा का कथन था- ''हमारे इतने बड़े संस्थान में जिसको कि आकाशवाणी कहा जाता था अनेक ऐसे कार्यक्रम थे, जो निष्णात, बुद्धिजीवी श्रोता.. ज्यादातर उसके लिए थे। अधिक संख्या में वह अखिल भारतीय श्रोता है जिसे हम और किसी बहुत अच्छे शब्द के अभाव में कहेंगे- सामान्य श्रोता, अंग्रेजी में कहें तो ले-लिस्नर। और सामान्य श्रोता की जो आवश्यकताएं थीं उनमें विविधता भी होनी चाहिए और भारतीयता भी होनी चाहिए। तो इन दो आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ''विविध-भारती'' उपयुक्त सिद्ध हुआ और इस प्रकार इसका प्रसारण आरंभ हुआ। (बॉम्बे) मुंबई एवं (मद्रास) चेन्नई, केन्द्र के लिए शॉर्ट-वेव पर एक साथ प्रसारण होता था। मुंबई से प्रसारण उत्तर और पश्चिम भारत के श्रोताओं तक पहुंचता था और मद्रास केन्द्र से पूर्व और दक्षिण के श्रोताओं तक। मद्रास केन्द्र पर विविध-भारती की पहली उद्घोषणा की, तेलुगु भाषा की उद्घोषिका राजलक्ष्मी ने। दरअसल उस दिन जिस उद्घोषक को ये उद्घोषणा करनी थी वो समय पर उपस्थित न हो पाया था। राजलक्ष्मी जी की उद्घोषणा के बाद ''कर्नाटक वाद्य संगीत'' का प्रसारण हुआ। इसके बाद राजलक्ष्मी जी मद्रास केन्द्र पर 7 बरस तक विविध-भारती की उद्घोषिका रहीं। विविध भारती के मुंबई केन्द्र से पहली उद्घोषणा की शील वर्मा ने। पहले दिन से ही 'पत्रावली' का प्रसारण शुरू हो गया। चूंकि शुरू के कुछ दिन श्रोताओं के पत्रों का आना संभव ही नहीं था इसलिए पूरे एक सप्ताह 'पत्रावली' में श्रोताओं के नाम विविध-भारती का पत्र प्रसारित हुआ।

विविध-भारती पर पहला प्रसार गीत मन्ना डे के स्वर में प्रसारित हुआ-  ''नाच रे मयूरा'' रचयिता थे पंडित नरेन्द्र शर्मा और संगीतकार अनिल बिस्वास। हवा महल का प्रसारण 20 अक्टूबर 1957 से आरंभ हुआ था। इस दिन जो पहला हवामहल प्रसारित हुआ था उसके लिए पंडित नरेन्द्र शर्मा ने एक विशेष संगीत नाटिका तैयार की थी- महारास।

हवामहल की पहली परिचय धुन पंडित सत्येन्दू शरत ने एक गुजराती गीत के आरंभिक अंश यानी प्रील्यूड से ली थी। दो-तीन वर्ष तक वही परिचय धुन प्रयोग में लायी गई फिर सन् 1960 में पहली परिचय धुन के आधार पर एक नई धुन बनाई जो आज तक इस्तेमाल हो रही है। विविध-भारती के विभिन्न कार्यक्रमों हेतु सुरीली परिचय धुनें तैयार करने की जिम्मेदारी निभाई अनिल बिस्वास, टी.के. जयराम अय्यर, एमिनी शंकर शास्त्री, सूर्यकुमार पाल, कृष्णा भट्टाचार्य और नीनू मजूमदार जैसे गुणी संगीतकारों ने।

विविध-भारती पर कार्यक्रमों के निर्माण और प्रस्तुति का दायित्व निभाया मधुप शर्मा, भृंगतुपकरी, शौकत कै$फी, रिफ़्त सरोश और सत्येन्दू शरत् जैसी प्रतिभाओं ने। भृंगतुपकरी संगीतिका पेश करते थे। शौकत कै$फी- मनचाहे गीत कार्यक्रम जिससे वो इसकी शुरूआत से जुड़ी हुई थी। सत्येन्दू शरत् पर हवामहल की जिम्मेदारी थी। रिफ्त सरोश पेश करते थे गीत औरग़ज़ल का प्रोग्राम- गजरा।

उन दिनों विविध-भारती पर प्रसारित होने वाले अन्य रोचक कार्यक्रम थे- वंदनवार (भक्ति संगीत), लोक संगीत, गीतों भरी कहानी, उदयगान, इंद्रधनुष, शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम- राग-रंग, सुगम संगीत का कार्यक्रम- मंजूषा और फौजी भाइयों के लिए पेश किया जाने वाला जयमाला कार्यक्रम- फौजी भाइयों के लिए पहला ''विशेष जयमाला'' कार्यक्रम पेश किया था अभिनेत्री नरगिस ने। विविध-भारती के इस बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम को पेश करने वाली अन्य मशहूर फिल्मी हस्तियों के नाम हैं- मीना कुमारी, प्रदीप कुमार, अशोक कुमार, देवआनंद, सोहराब मोदी,राजकुमार, धर्मेन्द्र, लता मंगेश्कर, आशा भोसले, शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर, सचिन देव बर्मन, गुलज़ार , चेतन आनंद, रोशन और मदनमोहन जैसे महान कलाकार।

देश के विभिन्न केन्द्रों से एक ही समय पर एक साथ कार्यक्रम प्रसारित हो सकेें, इसके लिए फिल्म प्रोड्यूसर्स की विशेष अनुमति से केवल एक बार प्रसारण हेतु फिल्मी गीतों को टेप कर डब करने की सुविधा, केवल विविध भारती को प्राप्त हुई।

विविध भारती की टीम ने सन् 1957 में जहां अपने कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग शुरू की थी, वहां आजकल दूरदर्शन मुंबई की इमारत है। वर्ली के इस स्थान पर एक बैरकनुमा कमरे में विविध-भारती के कार्यक्रम रिकॉर्ड होते थे। ये जगह न तो साउंड प्रूफ थी और न ही वातानुकूलित। विविध-भारती के सर्वकालिक लोकप्रिय कार्यक्रमों में- ''भूले-बिसरे गीत'' एवं ''संगीत सरिता'' कार्यक्रम भी शामिल है। अतीत में कुछ अन्य प्रसिद्ध कार्यक्रम रहे- चित्रध्वनि, चित्रशाला, अनुरंजनी, चौबारा, रंग-तरंग,साज़ और आवाज़ वगैरह। सन् 1958 में विविध-भारती को मुंबई से दिल्ली स्थित नये स्टूडियो में स्थानांतरित कर दिया गया। दिल्ली स्थानांतरित होते ही विविध भारती पर रोज़ाना  डेढ़ घंटे तक ''कर्नाटक संगीत सभा'' का प्रसारण शुरू किया गया। इस संगीत सभा के अंतर्गत तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा के सुगम, लोक, शास्त्रीय एवं फिल्म संगीत का प्रसारण किया जाता था। उन दिनों विविध-भारती से प्रसार गीत, नाटिकाएं, वाद्य संगीत, और फरमाइशी फ़िल्मी गीत भी प्रसारित किए जाने लगे। 1 नवंबर सन् 1967 को शुरूआत हुई विज्ञापन प्रसारण सेवा की, जिसकी पहली उद्घोषणा शील कुमार के स्वर में की गई थी। सन् 1972 में विविध-भारती का मुख्यालय एक बार फिर दिल्ली से मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। विज्ञापन प्रसारण सेवा की 25 वीं सालगिरह तक आते-आते 30 स्टेशनों से विज्ञापन आधारित कार्यक्रम प्रसारित होने लगे। इनमें स्पॉट और जिंगल्स के अलावा प्रायोजित कार्यक्रम भी शामिल हैं।

3 मई सन् 1970 की दोपहर साढ़े 12 बजे से विज्ञापन प्रसारण सेवा पर पहला प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित हुआ- ''सेरीडॉन के साथी''। रोश प्रॉडक्ट्स लि. के इस कार्यक्रम में मशहूर फिल्मी सितारे अपने साथी कलाकारों के बारे में दिलचस्प बातें बताया करते थे। इस कार्यक्रम की पहली मेहमान थीं- अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल। इस कार्यक्रम के कंपीअर और निर्माता  थे- अमीन सयानी।

उसी दिन दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर शुरू हुआ कोहिनूर मिल्स का कार्यक्रम- ''कोहिनूर गीत गुंजार'' गीतात्मकता को उभारने वाले इस कार्यक्रम के कंपीअर थे- पंडित विनोद शर्मा। लम्बे समय तक चलने वाला लोकप्रिय प्रायोजित कार्यक्रम था-  मनोहर महाजन द्वारा पेश किया जाने वाला- ''सेंटोजन की ममहफ़िल '' इस कार्यक्रम से जुड़े अन्य लोग थे- सईदुल हसन, अजय कश्मीरी, मोना अल्वी, रमेश तिवारी, मुज़्ज़फर  कादरी, विजय वर्मा और वी. सूरी। इस कार्यक्रम में रामरिख मनहर, टुन-टुन और मोहन चोटी जैसे कलाकार आमंत्रित किए जाते थे। कुसुम कपूर द्वारा तैयार किया जाने वाला कार्यक्रम ''किस्सा तोता मैना'' (प्रायोजक एल.आई.सी.), एवरेडी के हमस$फर और कृष्णायन (प्रायोजक जनरल इंश्योरेंस कॉर्पो.) कैलाश गोयल द्वारा निर्मित- ''अपनी कहानी-अपनी  ज़बानी '' भी लोकप्रिय थे।

विज्ञापन प्रसारण सेवा पर बजने वाला पहला  फ़िल्मी रेडियो स्पॉट कब-क्यूं-कहां फिल्म का था जिसे पेश करते थे- विजय बहल। मधुर भूषण और उनके पति बृजभूषण द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया जाने वाला कार्यक्रम- ''चेरीब्लॉ•म नोंक-झोंक'' को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया। विज्ञापन प्रसारण सेवा के कुछ अन्य सफल प्रायोजित कार्यक्रम थे- फेमिना टैक्सटाइल्स का- जॉनी वॉकर के जवाब, खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा प्रायोजित- '' आज़ादी  की अमर कहानी''। म$फतलाल मिल्स द्वारा प्रायोजित- अमृतवाणी, हिन्दुस्तान कोको लि. का- बोर्नवीटा क्वि•ा कांटैस्ट, रमा सयानी द्वारा प्रस्तुत- मोदी संगीत कहानी, सिबाका गीत माला (अमीन सयानी द्वारा प्रस्तुत नेटवर्क ब्रॉडकास्ट का पहला प्रोग्राम) वीडियोकॉन फिल्मीद्यारा , सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का-''आओ हाथ बढ़ाएं'' एवं ''नया सबेरा'', लक्स सितारों की सरगम, बिक्री कर पर सलाह का प्रायोजित कार्यक्रम- सेल्स टैक्स कंसल्टेंट, मानवता के सेवक, सवाल आपके-जवाब सितारों के, शिशुओं पर केन्द्रित ग्लैक्सो द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम- राग-अनुराग, पाश्चात्य संगीत पर केन्द्रित- फॉरच्यून रेडियो लिस्नर्स क्लब, बी.के. अंताक्षरी और पंडित विनोद शर्मा द्वारा पेश किया जाने वाला मशहूर प्रोग्राम- इंस्पेक्टर ईगल।

सन् 1936 में तत्कालीन निदेशक विजयलक्ष्मी सिन्हा ने विविध-भारती पर सातों दिन के लिए 1 घंटे का कार्यक्रम शुरू किया- पिटारा, जिसके अंतर्गत प्रसारित 'हैलो फरमाइश', 'सेल्युलॉइड के सितारे', 'सरगम के सितारे', 'हमारे मेहमान', 'चूल्हा चौका', सेहतनामा जैसे कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय हुए। बाद में पिटारा में एक नया कार्यक्रम जोड़ा गया- बायस्कोप की बातें। इसे पेश करते थे लोकेन्द्र शर्मा। हैलो फरमाइश भारत में रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में पहला इंटरैक्टिव फोन-इन प्रोग्राम था। विविध-भारती केन्द्र पर श्रीमती विजयलक्ष्मी सिन्हा के दौर में ही महानिदेशालय की पहल पर राष्ट्रीय प्रसाण हेतु राष्ट्रीय फिल्म पत्रिका चित्र भारती का निर्माण शुरू किया। विविध-भारती से करगिल युद्ध के दौरान प्रसारित हुआ- हैलो जयमाला, जो कालांतर में फोन कॉल्स के बदले पत्र आधारित हो गया और इसे नाम दिया गया- जयमाला संदेश।

केन्द्र निदेशक के रूप में राजेश रेड्डी के कार्यक्रम में कुछ और कार्यक्रम शुरू किए गए जैसे- उजाले उनकी यादों के, सखी-सहेली, सदाबहार नग्मे, गुलदस्ता, तेरे सुर मेरे गीत, और हिट-सुपरहिट, फेवरेट फॉइव। एस.एम.एस. के बहाने वी.बी.एस. के तराने, छाया गीत, आपकी फरमाइश, चित्रलोक गाने नये  ज़माने  के और आज के फनकार भी विविध-भारती के बेहद पसंद किए जाने वाले कार्यक्रम हैं। राजेश रेड्डी ने ही ''आकाशवाणी के पंचरंगी कार्यक्रम' के बदले इस सेवा को नया नाम दिया- विविध-भारती, देश की सुरीली धड़कन और विविध-भारती, आकाशवाणी की मनोरंजन सेवा।