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Sunday 25 Aug 2019

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कभी-कभार के छिटपुट जवाबों पर

जुड़े रह गए थे तार

जैसे आधी टांगें तुड़वाया हुआ चींटा

छिन्न-भिन्न, औंधा पड़ा हुआ

संजोये हुए त्वरा की स्मृति

चलाता रहता है

बचे हुए अपने पाँव हवा में

 

फिर मैंने कहा एक दिन,

कि करते हैं किसी दिन बातचीत तफसील से

बिल्कुल पुराने समय की तरह

बताना जब भी हो समय तुम्हारे पास, पर्याप्त

 

उस दिन

सारी टांगें टूट गईं चींटे की

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         मिट्टी

ताओयुआन एयरपोर्ट से लगेज बैग लेकर

ज्यांगोंग रोड स्थित अपने नये ठिकाने पर आकर 

सामान की जांच करने पर मैंने पाया

सही सलामत बैग में रखे पहुंच गये कपड़ों, तेल, मसालों के साथ

बैग के बाहर के उपेक्षित हिस्से में रखे चले आए थे

पुराने जूते

रखते समय, मैं झटकारना भूल गया था

उनके सोल में लगी बरसाती मिट्टी

 

उस मिट्टी के वहाँ रह जाने में

मेरी लापरवाही का प्रमाण था

फिर मैंने ध्यान दिया कि 

मिट्टी के कणों में

मैं अपने साथ ले आया था

अगस्त की बारिश

उत्तराखंड से राजस्थान की बरसाती यात्रा

थोड़ा सा उत्तराखंड, थोड़ा सा राजस्थान

थोड़ा सा हिमालय, थोड़ी सी अरावली

संभव है, कुछ अंश दिल्ली का होना भी

 

चूंकि मिट्टी जूतों पर थी

मैंने दोहराई

नानाजी की सिखाई प्रात:कालीन क्षमा प्रार्थना

पादस्पर्शं क्षमस्व मे

मिट्टी को झड़कार कर बटोरा

और संभालकर रख दिया

ग्यारहवीं मंजिल के अपने कमरे की अलमारी में

 

हर प्रवासी अपने-अपने प्रतीकों में सुरक्षित रखता है देश

सबके भीतर एक सहमा हुआ बहादुर शाह जफ़र बैठा है

जो अंत में लौट आना चाहता है अपने वतन

होने को राख या दफन 

 

थोड़े से अन्न-पानी का उन्माद खींच लाता है

प्रवासी पक्षियों को विदेश

वे वहाँ बस जाने नहीं आते

मर जाने तो कतई नहीं

उनकी पुतलियों में बसता है वापसी का रास्ता

डैनों के सिरों पर

या देह और पंखों की परतों के अंतरजाल में

हर पक्षी रखता है महफूज़

कहीं कुछ गंध, कुछ मिट्टी अपने देश की

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            स्थितप्रज्ञ

 

संभव है,  तुम्हें पता ना हो

पर एक अख़बार हुआ करता था

एकदम सटीक प्रतीत होता था जिसका राशिफल

 

उचित नहीं था यह, विज्ञान के छात्र के लिए

पर मैं रोज़ पढ़ता था वह दैनिक राशिफल

ज्योतिष में विश्वास हो जाना

मेरे अंदर रची-बसी पारंपरिक मध्यमवर्गीय सोच हो सकती थी

यहाँ कोई नहीं बनना चाहता नींव का पत्थर, जो दिखता ही ना हो

हर किसी को बनना है दीवार की सबसे ऊँची ईंट

राशिफल एक ईंट ऊपर चढ़ जाने की उम्मीद भर हुआ करता था

 

मुझे भी बनना था कतार का पहला व्यक्ति

हालाँकि मेरी राशि, क्रम में अंतिम होती है

तो अपने से पहले, मैं पढ़ता था, तुम्हारा राशिफल

विशेष रूप से तुम्हारे इस निर्णय के बाद कि, अब बहुत हुआ

उस समय हम दोनों का संभावित साझापन

सिर्फ़ ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल चाल से अपेक्षित था

 

कैलेंडर के बदलते पन्नों और बदलते कैलेंडरों के साथ

मैंने स्वीकारे हैं कई और कठोर निर्णय 

तुम्हारे निर्णय के अतिरिक्त

बदली हुई मानसिकता और प्राथमिकताओं के साथ

संभवत: एक दूसरा व्यक्ति हूँ अब मैं

राशिफल पढऩा छोड़ चुका हूँ

 

उपलब्धि के गुणसूत्र कुछ और हैं अब मेरे लिए

अब मैं अपनी एक अलग कतार में

हड़बड़ी से दूर,  प्रच्छन्नता में संतुष्ट

नींव का पत्थर बनना चाहता हूँ

 

 

मेरी उम्मीद के दीपक का तेल

अब वे निर्णय नहीं हैं

जो दूसरों द्वारा लिए जाते हैं

 

अधिक नहीं तो

एक प्रतिशत स्थितप्रज्ञ बनने की ओर

यह मेरा पहला कदम है