Monthly Magzine
Wednesday 20 Mar 2019

शताब्दी किस ने देखी है ।

हर दिन शुरु होता है

सुबह की ताजग़ी

गुनगुनी धूप से

रोटी के राग के साथ

बीत जाता है

उदास शाम के धुँधलके में।

दिन बदलता है सप्ताह में

जो शुरु होता है

नए संकल्प के साथ

हर काम लेकिन टलता है

अगले सप्ताह के लिए ।

देखते देखते

सप्ताह बदल जाता है महीने में

जो शुरु होता है नए जोश के साथ

ख़त्म होता है

रोज़ कम होने वाले मासिक वेतन सा।

बारह महीनों बाद

आता है नया वर्ष

जो शुरु होता है ढेरों बधाइयों

नई योजनाओं के साथ

जो रह जाती बन पंचवर्षीय योजना

सिर्फ कागज़़ पर।

वर्षों बाद

शताब्दी किस ने देखी है

बस आदमी रोज़ जीता है

रात को मरता है ।