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Saturday 27 May 2017

गजल

  • नम सुभाष
  • May  2013   ( अंक164 )
    By : aaaaa     View in Text Format    |     PDF Format
  • केशव शरण
  • May  2013   ( अंक164 )
    By : aaaaa     View in Text Format    |     PDF Format
  • अक्षय गोजा
  • May  2013   ( अंक164 )
    By : aaaaa     View in Text Format    |     PDF Format
  • पांच गजलें
  • May  2013   ( अंक164 )
    By : aaaaa     View in Text Format    |     PDF Format
  • सच कहा हमने उसे झूठा कथन माना गया सादगी को भी कपट का आवरण माना गया।
  • June  2013   ( अंक165 )
    By : चन्द्रसेन विराट     View in Text Format    |     PDF Format
  • काम अपना हो तो सौ बार पहुंच जाते हैं दूर कितना भी हो दरबार पहुंच जाते हैं।
  • June  2013   ( अंक165 )
    By : देवेन्द्र आर्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • भीड़ को देखकर खुश हुए, सूनी बस्ती में घर खुश हुए।
  • June  2013   ( अंक165 )
    By : जहीर कुरैशी     View in Text Format    |     PDF Format
  • सब कुछ नया-नया है मिरे आसपास में, गोया कि खो गया हूं, शहरे-नासनास* में।
  • June  2013   ( अंक165 )
    By : ज्ञानप्रकाश पाण्डेय     View in Text Format    |     PDF Format
  • जिंदगी
  • August  2013   ( अंक167 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • घर वाले हो गये हैं घर में बेकाबू
  • September  2013   ( अंक168 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format