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Sunday 23 Apr 2017

साक्षात्कार

  • खेमसिंह डहेरिया- आपके कथाकार बनने, होने की क्या, कोई ऐसी उल्लेखनीय पृष्ठभूमि है, जिसे आप व्यक्त करना चाहते हैं? और आपने गद्य की इस विधा का चुनाव क्यों किया?
  • June  2013   ( अंक165 )
    By : डॉ.खेमसिंह डहेरिया     View in Text Format    |     PDF Format
  • \'कविता में मानव समाजों से बने लोक की आत्मा निवास करती है\'
  • March  2014   ( अंक174 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • \'फिल्म की सफलता-असफलता को \'सौ करोड़ क्लब से जोडऩा बिलकुल गलत बात है : बासु चटर्जी
  • May  2014   ( अंक176 )
    By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • लेखक भूमण्डलीकरण को विषय बनाकर कथा-लेखन नहीं करता
  • August  2014   ( अंक179 )
    By : डॉ. ललित श्रीमाली     View in Text Format    |     PDF Format
  • ललित निबंध कष्टसाध्य और साधनापरक विधा है
  • October  2014   ( अंक181 )
    By : विवेक दुबे     View in Text Format    |     PDF Format
  • लोक संस्कृति निरंतर गतिमान रहती है : विष्णु प्रभाकर
  • November  2014   ( अंक182 )
    By : महावीर अग्रवाल     View in Text Format    |     PDF Format
  • \'चिरंजीव\' मेरा दिल है, \'सात फेरे\' मेरी दुनिया- चंद्रकिशोर जायसवाल
  • February  2015   ( अंक185 )
    By : अरुण अभिषेक     View in Text Format    |     PDF Format
  • मुझे खुदा ने ग़ज़ल का दयार बख्शा है, ये सल्तनत मैं मोहब्बत के नाम करता हूं।
  • March  2015   ( अंक186 )
    By : रोहित कौशिक     View in Text Format    |     PDF Format
  • ‘‘बदरी बाबुल के अंगना जइयो....’’
  • May  2015   ( अंक188 )
    By : वैद्यनाथ झा     View in Text Format    |     PDF Format
  • सुर से सुर मिलते ही रहना चाहिए : गुलाम अली
  • July  2015   ( अंक190 )
    By : राजीव रंजन श्रीवास्तव     View in Text Format    |     PDF Format