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Tuesday 21 Aug 2018

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साहित्य की हर विधा की भाषा, शैली और विषय निरूपण की अपनी-अपनी विशिष्टताएं होती हैं, इसलिए प्रत्येक विधा पाठक अथवा सहृदय से एक विशिष्ट व्यवहार की प्रत्याशा रखती है। मसलन उपन्यास को ही लें। अगर उपन्यास आकार में छोटा है तब भी उसे पढऩे के लिए सामान्य तौर पर कम से कम एक दिन का वक्त चाहिए और वह भी ऐसा कि पढ़ते समय कोई खलल न पड़े। नाटक को पढ़ा तो जा सकता है, लेकिन उसका रसास्वाद रंगमंच पर प्रस्तुति से ही संभव है। कविता भी पाठक से धैर्य और तल्लीनता की मांग करती है। उसे समाचार पत्र में छपी खबर की तरह नहीं पढ़ा जा सकता। इन सबसे अलग स्थिति कहानी की है। कहानियां अमूमन बहुत

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