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Saturday 27 May 2017

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ललित सुरजन
कुमार विनोद गणित के प्रोफेसर हैं इसलिए इस सवाल का जवाब वे ही बेहतर दे सकते हैं कि उनके हाल में प्रकाशित गजल संग्रह में अठहत्तर रचनाएं किस हिसाब से हैं, पचहत्तर, अस्सी या सौ क्यों नहीं? लेखक से यह पूछने का भी मन होता है कि एक तरफ गणित का अध्ययन-अध्यापन तथा दूसरी ओर कविता और गजल का लेखन। इन दो विपरीत धाराओं के बीच वे संतुलन किस तरह स्थापित कर पाते हैं। संभव है कि गणितज्ञ-लेखक उनके अलावा और भी हों, किन्तु उनका परिचय पढक़र किंचित आश्चर्य  होता ही है। वह यूं कि गणित को एक रूखा विषय माना जाता है जिसमें रस के लिए कोई स्थान नहीं होता। गणित का अध्येता

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