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कमल चंचल
अक्षर पर्व के मई अंक का मुखपृष्ठ मुझे मेरी माता की याद दिला गया। मां ऐसे ही मुनगे को छील कर सब्जी बनाने छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा करती थीं। बहरहाल ये चंद टुकड़े अक्षर पर्व पर उत्साह और उमंग से नृत्य करते लगे। प्रस्तावना सटीक और विचारणीय है। कविता और ग़ज़लें अच्छी लगी।
कमल चंचल |
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March Edition |
Thursday, March 11, 2010,4:00:22 AM |