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Tuesday 23 Jan 2018

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गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम लेते साथ अनायास ही चाँद का मुंह टेढ़ा है और अंधेरे में जैसे उनकी कविताओं के शीर्षक आंखों के सामने आ जाते हैं। हम उन्हें प्रथमत: कवि के रूप में ही स्मरण करते हैं। फिर कामायनी: एक पुनर्विचार, एक साहित्यिक की डायरी आदि के माध्यम से साहित्यिक आलोचना में उनके अप्रतिम योगदान का ध्यान आता है। वे अपने ढंग के एक अनूठे कथाशिल्पी थे, यह परिचय विपात्र, ब्रह्मराक्षस का शिष्य, क्लाड ईथरली आदि रचनाओं से प्राप्त होता है। बीसवीं सदी का यह बहुविधा निष्णात लेखक एक सजग, सतर्क, विचारसम्पन्न पत्रकार भी था, इस तथ्य को अक्सर बिसरा दिया जाता है। वे नागपुर में नया खून नामक साप्ताहिक अखबार से जुड़े थे, इतना तो

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  • By : डॉ. राधेश्याम शुक्ल     View in Text Format    |     PDF Format
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