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Wednesday 23 May 2018

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वह जीवन ही क्या जो सीधी-सरल राह पर चले! हर व्यक्ति की ज़िन्दगी में लगभग बिना अपवाद के न जाने कितने घेरदार-घुमावदार मोड़ आते हैं, न मालूम कितने उतार-चढ़ाव उसकी परीक्षा लेते हैं; फिर भी एक दौर, वह छोटा ही क्यों न हो, अवश्य आता है जब वह चारों तरफ से बेपरवाह होता है। तकलीफें और मुसीबतें उस पर हमलावर होती हैं, किन्तु वह हंसकर उनका इस्तकबाल करता है। उसका आत्मविश्वास कहता है कि ये दिन आसानी से गुज़र जाएंगे। यह दौर अमूमन व्यक्ति की तरुणाई के दिनों में होता है। उसकी आंखों में चमक होती है। उस चमक में सपने पलते हैं। हृदय में सपनों को हकीकत में बदलने की आशा और किसी हद तक ज़िद होती है। यह

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