गजलें
पुराने अलबम में दिखा बचपन का हैरान चेहरा
अबकी बूढ़ी माँ का तब था कैसा जवान चेहरा आगे..
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माथे पे रख के हाथ
माथे पे रख के हाथ मुझे फिर सुला दिया
मैं कैसे मान लूं मुझे उसने भुला दिया आगे..
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गजलें
सशंकित माँ की बानी हो रही है,
बड़ी बिटिया सयानी हो रही है।
है मीठी गंध लगभग हर दिशा में,
प्रफुल्लित रातरानी हो रही है।
आगे..
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गजलें : शतदल
वो जो थोड़ी मुश्किलों से हो के आजिज मर गए।
उनसे क्या उम्मीद थी और देखिए क्या कर गए?
आगे..
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उसी की चाह है
'चर्चा-ए-महफिल है, उनकी जालिम निगाह है,
फिर भी, दिल-ए-नादां, उसी की चाह है।' आगे..
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रोशनलाल 'रौशन'
अपनी पहचान पा गया हूं मैं
आप को इतना जानता हूं मैं
आगे..
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गजल
अपने मुँह पर ताले रखना
खुद को आज संभाले रखना
आगे..
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अशोक आलोक
हिफाजत में कोई पलता हुआ नासूर लगता है
सियासत से बहुत छोटा हरेक कानून लगता है
आगे..
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