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गजलें : शतदल
वो जो थोड़ी मुश्किलों से हो के आजिज मर गए। उनसे क्या उम्मीद थी और देखिए क्या कर गए?  आगे..
कभी नहीं पहुंचे हम वहाँ...
कभी नहीं पहुंचे हम वहाँ
जहां देखकर दूसरों का
 आगे..
उसी की चाह है
'चर्चा-ए-महफिल है, उनकी जालिम निगाह है,
फिर भी, दिल-ए-नादां, उसी की चाह है।'
 आगे..
रोशनलाल 'रौशन'
अपनी पहचान पा गया हूं मैं
आप को इतना जानता हूं मैं
 आगे..
गजल
अपने मुँह पर ताले रखना
खुद को आज संभाले रखना
 आगे..
अशोक आलोक
हिफाजत में कोई पलता हुआ नासूर लगता है
सियासत से बहुत छोटा हरेक कानून लगता है
 आगे..
मोहन सगोरिया
हर इक शै इम्कान में रखना
अच्छी बातें ध्यान में रखना
  आगे..
कुंअर बेचैन
कुछ लोग जिनके तन पे वसन गेरुए मिले
उथली नदी के बीच में गहरे कुएं मिले
  आगे..
गुलनाज
मेरे खामोश दरिया में आने वाली खानियां बहुत हैं,
इस तन्हा जिन्दगी में अभी बाकी परेशानियां बहुत हैं।
  आगे..
बनाफर चन्द्र
ठूंठ के पास फल नहीं होते
गम में खुशियों के पल नहीं होते
  आगे..

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