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गजलें
पुराने अलबम में दिखा बचपन का हैरान चेहरा
अबकी बूढ़ी माँ का तब था कैसा जवान चेहरा
 आगे..
माथे पे रख के हाथ
माथे पे रख के हाथ मुझे फिर सुला दिया
मैं कैसे मान लूं मुझे उसने भुला दिया
 आगे..
फूलों से लदे खिलते चमन
फूलों से लदे खिलते चमन की किताब है
बाँहों में मेरी उसके बदन की किताब है
 आगे..
गजलें
सशंकित माँ की बानी हो रही है,
बड़ी बिटिया सयानी हो रही है।
है मीठी गंध लगभग हर दिशा में,
प्रफुल्लित रातरानी हो रही है।
 आगे..
गजलें : शतदल
वो जो थोड़ी मुश्किलों से हो के आजिज मर गए। उनसे क्या उम्मीद थी और देखिए क्या कर गए?  आगे..
कभी नहीं पहुंचे हम वहाँ...
कभी नहीं पहुंचे हम वहाँ
जहां देखकर दूसरों का
 आगे..
उसी की चाह है
'चर्चा-ए-महफिल है, उनकी जालिम निगाह है,
फिर भी, दिल-ए-नादां, उसी की चाह है।'
 आगे..
रोशनलाल 'रौशन'
अपनी पहचान पा गया हूं मैं
आप को इतना जानता हूं मैं
 आगे..
गजल
अपने मुँह पर ताले रखना
खुद को आज संभाले रखना
 आगे..
अशोक आलोक
हिफाजत में कोई पलता हुआ नासूर लगता है
सियासत से बहुत छोटा हरेक कानून लगता है
 आगे..

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