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मुफ्त में ठगी
बूढ़े किसान ने खरीदा एक बोरा बढ़िया बीज  आगे..
नये दौर में विभक्त होते हुए
सुनें सामाजिक... घर में रहते बाजार में रहना किताबों पर गर्द का कव्हर चढ़ाते रहना  आगे..
'रायपुर में 1976 में मुक्ति बोध के घर जाने पर'
सूरज का सोंधा भुना लालारुख कछुवा बिंधा भिलाई की चिमनियों-से  आगे..
सिध्दूभा
सिध्दूभा अलमस्त मिजाज के थे
वे कोई सिध्द पुरुष नहीं थे
 आगे..
जल्बाज जलद
जबसे बोतलबंद हुआ है पानी
हथेली भूलने लगी है चुल्लू बांधना
 आगे..
सोना और प्लास्टिक
अगर कभी पैदा किए जा सके सोने में
प्लास्टिक के गुण तो दाम इसके चढ़ेंगे?
 आगे..
दोस्तों के बारे में
विस्मृत थोड़ा बाद में आती है
जो सबसे ज्यादा तीखी होती है उस याद के प्रेम में
 आगे..
लंबी कविता : माया में माया
स्वप्न
जहाँ लागू नहीं होते इस दुनिया के तर्क न्याय और नाप
 आगे..
बेशरम कथा
ताने-बाने चारों तरफ हैं
बात बेशरम के पेड़ की है
 आगे..
बाजार की प्रतीक्षा में
करते रहते है
जी तोड़ मेहनत
 आगे..

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