दोहों में दिनमान
उजले धन के हो गए काले कारोबार।
ऊपर की ही आय अब अर्जन का आधार।।
आगे..
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कविता?
कविताएं
कागजों पर नहीं लिखी जातीं,
पढ़ी नहीं जाती मुंह से
सुनी नहीं जातीं कानों से
देखी नहीं जातीं आंखों से आगे..
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गांधारी-घोष
लो!
मैंने बांध लीं / स्याह-पट्टियां /
आँखों से / कसकर / सदैव के लिए आगे..
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समुद्र
अभी कुछी देर पहले पनडुब्बियां विशाल
गुजरी थीं बिलकुल यहीं से अकस्मात
यहीं से गुजरे थे सेना को ले जाते हुए जहाजा भव्य आगे..
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एक मामूली आदमी
न मालूम कहाँ से
जुटा रखता है सम्बल
तमाम विपरीत हालात में
जिन्दा रह पाता है, आगे..
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हाय...मेहनत हुई...भिखारी!
तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन
जूठन में डाले हैं !!
भरे पेट इतराते इतने
बुरी आदतों के पाले हैं!!
आगे..
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