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समकालीन सच की कविताएं 'दूर क्षितिज तक'
नरेश दाधीच के पहले काव्य संग्रह 'दूर क्षितिज तक' की पहली कविता 'दूर गगन से आया पंछी' में समकालीन जीवन के सच के रुप में 'भय का साया है आगे..
'नहीं' में है मानवीय जिजीविषा की पक्षधरता
चाहे कविता हो या कथा, किसी भी संकलन का शीर्षक- 'नहीं'- कुछ अटपटा लगेगा कि नहीं?  आगे..
'ऍंधेरे का ताला' उजाले का रास्ता
सुपरिचित लेखिका ममता कालिया का उपन्यास 'अंधेरे का ताला' का नाम ही प्रतीकात्मक है- अंधेरे से उजाले की ओर यूं ही नहीं जाया जाता।  आगे..
स्त्री मन को पढ़ने की कहानियां
ईमानदारी की बात यह है कि मैंने शमोएल अहमद की सारी कहानियां पढ़ी नहीं।  आगे..
संवेदना की जमीन पर जन्म लेती कहानियां
हिन्दी कथा साहित्य दो धाराओं में विकसित होता हुआ दिखाई देता है।  आगे..
निबंधों का परिदृश्य
डॉ. अमलसिंह 'भिक्षुक' का पहला निबंध-संग्रह समकालीन हिन्दी कविता, आलोचना तथा अन्य निबंध एक ऐसी आलोचना- आगे..
'कुछ अंगारे कुछ फुहारे'
गेय छान्दसिकता जहां गीतों और गजलों को जन्म देती है, वहीं गीतों और ंगालों की दिपदियां मुक्तकों को जन्म देती हैं।  आगे..
सिर्फ मौसम का इश्तिहार नहीं रोहिणी का तपना
गांव में रोहिणी का तपना बेहद त्रासद हुआ करता है। इन्हीं दिनों नीम की निम्बोलियां झरा करती हैं  आगे..
''पिता से मिले सपने'': नस्लभेद के अंधेरे से निकला सूरज
अमेरिका में पहली बार एक अश्वेत व्यक्ति के राष्ट्रपति चुने जाने को वहां लोकतंत्र की सच्ची जीत का प्रमाण माना गया है।  आगे..
समय की मुकम्मल तस्वीर को मूर्त करती हैं लघुकथाएं
पृथ्वीराज अरोड़ा हरियाणा के ऐसे लघुकथाकारों में अग्रगण्य हैं जिन्होंने समकालीन लघुकथा परिदृश्य  आगे..

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