ताइवान: 'सकामोनी बूडा' सामना
अगर किसी काम से आपका ताइवान जाना हो और वहाँ कोई आपसे 'सकामोनी बूडा' बारे में विस्तार से कुछ पूछने लगे तो आप निश्चय ही सोच में पड़ जायेंगे कि आखिर पूछा किसके बारे में जा रहा है। और यह जानकर तो आप भौंचक ही रह जायेंगे कि आपसे भारत के ही एक महान सपूत के बारे में पूछा जा रहा है। ऐसा ही अनुभव मुझे सितंबर 2008 के ताइवान प्रवास में हुआ। पर कुछ क्षण बाद ही प्रश्न का खुलासा दिमाग में कौंध गया। जी हाँ, 'सकामोनी बूडा' र कोई नहीं हमारे 'शाक्यमुनि बुद्ध'के मंडारिन संस्करण 'सकामोनी बूडा'के नाम से याद रखा जाता है। आगे..
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महाकवि निराला का घर-द्वार
हर साल सितम्बर माह में हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की स्थायी समिति की बैठक में इलाहाबाद जाना होता है। रायपुर से छत्तीसगढ़ प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष ललित सुरजन और सम्मेलन के संरक्षक प्रभाकर चौबे स्थायी समिति के सदस्य हैं। अत: हम तीनों का जाना तय रहता है। दो हजार सात की यात्रा में वरिष्ठ कवि बसंत देशमुख भी साथ गए। आगे..
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मेरा शहर शहर की खामोशी
निर्मल वर्मा की पुरानी और प्रसिध्द कहानी 'अंधेरे में' में एक पात्र वीरेन चाचा भी है। आगे..
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मेरा शहर चांद का अपना शहर
सेंट जोसेफ कान्वेन्ट की बरसों पुरानी इमारतों के करीब ही विक्टोरियन शैली के तीन मकान हुआ करते थे। आगे..
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मेरा शहर
लौटती सर्दियों की शाम है। अक्टूबर के वे दिन, जो कोजागिरी के करीब के दिन होते हैं। आगे..
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