चक्रव्यूह में सोच
फक्त जिन्दगी का क्या भरोसा। कब दम निकल जाये। सो भाई-जीतेजी आपसयारी में ही मजा है। गुमसुम चुपचाप अकेले में,
रुठे हुए या सूखे हुए जिन्दगी आगे..
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खेल-खेल में खेल
बच्चे विचित्र होते हैं। प्रतिभा-संपन्न भी। वे खेल-खेल में कोई नया खेल खोज लेते हैं। आगे..
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भागते हुए समय का दस्तावेज
आधी शताब्दी बीत गयी, तब से मैं निरन्तर भागते हुए समय का प्रत्यक्षदर्शी बना बैठा हूँ। मेरे सामने घड़ी है, घड़ी गतिमान आगे..
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