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कभी अकेले में मुक्ति नहीं मिलती (1)
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हिन्दी के ऐसे कवि, कथाकार, उपन्यासकार और चिंतक थे, जिन्होंने भारत की औपनिवेशिक स्वतंत्रता के आसपास और उसके बाद, बदलती सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों में मूलत: एक स्वतंत्र मनुष्य के रुप में  आगे..
कभी अकेले में मुक्ति नहीं मिलती (2)
'रोज' कहानी में मालती का पति महेश्वर हालांकि स्थानीय डिस्पेंसरी में डाक्टर है, लेकिन है  आगे..
'मैं वह धनु हूं जिसे साधने में प्रत्यंचा टूट गई है'
आधुनिक हिन्दी कविता में अनेक महान कवि हुए, पर तीन-निराला, अज्ञेय और मुक्तिबोध ऐसे हुए,  आगे..
वीणा में बसी हुई तरु की आत्मा ( 1)
'असाध्य वीणा' अज्ञेय की लम्बी कविता है जो चौदह पृष्ठों में फैली हुई है।  आगे..
वीणा में बसी हुई तरु की आत्मा (2)
'जय देवी यश:काय
वरमाल लिये
गाती थी मंगल-गीत
दुन्दुभी दूर कहीं बजती थी
 आगे..
अज्ञेय से एक परिचय
वह 1973 का वर्ष रहा होगा। अज्ञेय भोपाल पधारे थे। उनसे मिलने के लिये अशोक वाजपेयी ने हमें अपने घर बुलाया था।  आगे..
काव्य दृष्टि को नई दिशा और दशा दी थी 'अज्ञेय' ने
अज्ञेय का विचार है कि मनुष्य के लिए इतना ही पर्याप्त नहीं है कि उसकी बाह्य आवश्यकताएं पूरी हो जायँ,  आगे..
अज्ञेय को पीछे मुड़कर देखना
अज्ञेय के समूचे लेखन कर्म को इस संदर्भ में देखने पर मेरी निगाह में उनकी विवादास्पदता गौण ठहरती है।  आगे..
हिन्दीतर-भाषियों में हिन्दी (1)
चौदहवीं सदी से उन्नीसवीं सदी के पूर्व भाग तक ंफारसी-कादिमी (उर्दू) भारत-भर में (जहां-जहां मुसलमानों के राज थे) संपर्क भाषा और राजभाषा थी।  आगे..
हिन्दीतर-भाषियों में हिन्दी (2)
अगस्त्य अपने दल के साथ तमिल देश में आये और यहीं बस गये-पोतियों मलै पहाड़ी प्रदेश में।  आगे..

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